मैं हिमालय हूँ मैं ऊँचा वृक्ष हूँ मैं होले से बहता हवा का झोंका हूँ, जो गाँव-गाँव व शहर-शहर बह रहा हैं, मैं एक नदी हूँ जो घाटियों से निकल, नीचे बह रहा हैं मैं वो नेत्र हूँ जो दूर भविष्य को साफ देखता हैं, अगर तुमसे कोई पूछे, कौन हूँ मैं? तुम खड़े होना और कहना, मैं विशाल हूँ मैं बादलों के ऊपर उड़ता हुआ बाज हूँ, मैं एक शेर हूँ जो इन घनघोर जंगलों में वाश करता हैं, मैं वो भीड़ हूँ जो दूसरो की मदद करता हैं, मैं सर्वशक्तिमान हूँ, अगर तुमसे कोई पूछे, कौन हूँ मैं? तुम खड़े होना और कहना, मैं पर्वत की ऊँची चोटी हूँ मैं आकाश में टिमटिमाता तारा हूँ मैं एक छोटी सी आशा की किरण हूँ मेरे साथ सभी रस्सी से जुड़ें हैं, और मैं महसूस करता हूँ कि इस संसार को मैं महान बनाता हूँ, जिंदगी के दौड़-भाग में, प्रेम के दो बूँद गिराता चल और ये संसार तुम्हें घोषित करेगा, महान एक दिन। @Rajnish