Skip to main content

एक छोटी गोरैया।

आई घर के आंगन में,
कुछ बोला उसने
पर सुना न किसी ने
उस वक़्त,
चु चु करके
घर आगंन में, छतो पर, पेड़ो पर
आई हर बार
पर सुना न किसी ने
फुदकते फुदकते
अपने छोटे छोटे पैरो से
मन मोह लेती थी सबका
एक छोटी गोरैया
पर उस वक़्त सुना न किसी ने।।

Comments

Popular posts from this blog

मन का पक्षी

मन का पक्षी उड़ा गगन में कभी इधर तो कभी उधर ज़मी से उड़ा था छूने नीले गगन को, भटका वो खूबसूरती को देख उतरा ज़मी पर ना लगा ध्यान उसका फिर से उड़ा फिर भटका, थक हार के आया ज़मी पर ना था उसका कोई एक ठिकाना जाता कहा वो? उसने लिया साहस से काम निकला वो जंगलों के बीच किया इकठ्ठा तिनकों को, दे पसीना-दे पसीना बना डाला अपना एक ठिकाना, अब न भटका अब न रोया क्योंकि था उसका एक ठिकाना मन का पक्षी उड़ा गगन में बिन तनाव, बिन परेशानी।