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तलाश

हर तरफ शान्ति है मायूसी हे,
मै हू की उसमे भी ख़ुशी तलाश कर रहा,
पर नहीं हो पाया खुश,
कहा से हो पाता...
मायूसी से भरे समन्दर मे ख़ुशी जो तालाश कर रहा था...
उस आने वाले ख़ुशी की तलाश मे
आज की ख़ुशी पर ताला लगा दीया था...
धड़कन रुक सी गई थी ऐसा महसूस होने लगा था...
समां भी थम सा गया था,
वीरान सा था चारो तरफ..
फिर भी निकल पड़ा ख़ुशी की तलाश मे,
उसी समन्दर की तरफ जहां शायद ही मिले वो...
देखते है क्या हे वहाँ?? 

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मन का पक्षी

मन का पक्षी उड़ा गगन में कभी इधर तो कभी उधर ज़मी से उड़ा था छूने नीले गगन को, भटका वो खूबसूरती को देख उतरा ज़मी पर ना लगा ध्यान उसका फिर से उड़ा फिर भटका, थक हार के आया ज़मी पर ना था उसका कोई एक ठिकाना जाता कहा वो? उसने लिया साहस से काम निकला वो जंगलों के बीच किया इकठ्ठा तिनकों को, दे पसीना-दे पसीना बना डाला अपना एक ठिकाना, अब न भटका अब न रोया क्योंकि था उसका एक ठिकाना मन का पक्षी उड़ा गगन में बिन तनाव, बिन परेशानी।