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शायद कुछ कर दिखाऊ

कुछ पुराना ही करू या कुछ नया कर दिखाऊ
या नया को अपनाऊ या ना भी अपनाऊ,
सपनो में खो के दिखाऊ
या सपनो को पूरा कर दिखाऊ,
चल के दिखाऊ, दौड़ के दिखाऊ
उड़ के दिखाऊ, तैर के दिखाऊ
रो के दिखाऊ, हँस के दिखाऊ
बिछड़ के दिखाऊ, मिल के दिखाऊ
मासूमियत को अपनाऊ, या नीच व बुरा बन जाऊं
क्या बोल के सुनाऊ, क्या लिख के दिखाऊ
दंगा कराऊ, या एकजुट कराऊ
गरीबो को मार भगाऊ, या गरीबी मिटाऊ
या अपने ही प्रश्नों में दफ़्न होके दिखाऊ
शायद कुछ कर दिखाऊ।

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मन का पक्षी

मन का पक्षी उड़ा गगन में कभी इधर तो कभी उधर ज़मी से उड़ा था छूने नीले गगन को, भटका वो खूबसूरती को देख उतरा ज़मी पर ना लगा ध्यान उसका फिर से उड़ा फिर भटका, थक हार के आया ज़मी पर ना था उसका कोई एक ठिकाना जाता कहा वो? उसने लिया साहस से काम निकला वो जंगलों के बीच किया इकठ्ठा तिनकों को, दे पसीना-दे पसीना बना डाला अपना एक ठिकाना, अब न भटका अब न रोया क्योंकि था उसका एक ठिकाना मन का पक्षी उड़ा गगन में बिन तनाव, बिन परेशानी।